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क्या कहूँ बहुत कुछ कहना अच्छा लगता है।क्या कहूँ बहुत कुछ सुन्ना अच्छा लगता है।।कभी तो हालात कुछ बोलने नहीं देते।कभी तो शब्दो के जाल…

मैं क्या कहूं क़ी ज़िन्दगी कहाँ आकर अटक जाती है।मैं क्या कहूँ की ज़िन्दगी कहाँ जाकर रुक जाती है।।कुछ तो समझा ऐ ज़िन्दगी क्यों तू…

जन्मदिन आया है, तो बचपन याद आया है।माँ का प्यार और पापा का दुलार याद आया है।।माँ के बनाये पकवान याद आये हैं।पापा का लाया…